कुछ लोगों को प्रार्थना पसन्द नहीं ; अगर वे अपने हृदय की गहराई में जायें तो देखेंगे कि यह घमण्ड है – उससे भी बढ़ कर, मिथ्या अभिमान है। और फिर ऐसे लोग है जिनमें कोई अभीप्सा नहीं होती। वे कोशिश करते हैं फिर भी अभीप्सा नहीं कर सकते । यह इसलिए क्योंकि उनके अन्दर संकल्प की ज्वाला नहीं होतीं , यह इसलिए कि उनमें नम्रता की ज्वाला नहीं होती।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड -५)
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…
अभीप्सा का तात्पर्य है, शक्तियों को पुकारना । जब शक्तियाँ प्रत्युत्तर दे देती हैं, तब…