नम्रता की ज्वाला


श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ दर्शन देते हुये

कुछ लोगों को प्रार्थना पसन्द नहीं ; अगर वे अपने हृदय की गहराई में जायें तो देखेंगे कि यह घमण्ड है  – उससे भी बढ़ कर, मिथ्या अभिमान है। और फिर ऐसे लोग है जिनमें कोई अभीप्सा नहीं होती। वे कोशिश करते हैं फिर भी अभीप्सा नहीं कर सकते । यह इसलिए क्योंकि उनके अन्दर  संकल्प की ज्वाला नहीं होतीं , यह इसलिए कि उनमें नम्रता की ज्वाला नहीं होती।

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड -५)


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