और लोग क्या करते हैं उसके बारे में अपने-आपको कष्ट न दो, मैं इस बात को बार-बार नहीं दोहरा सकती।औरों के बारे में निश्चय न करो, दूसरों की निंदा न करो, औरों के साथ तुलना न करो। इसका तुम्हारे साथ कोई वास्ता नहीं।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
आमतौर पर यह माना जाता है कि शिक्षा की प्रक्रिया में हल्की, मनोरञ्जक बल्कि तुच्छ…
विरोधी शक्तियों को संसार में इसीलिए सहा जाता है क्योंकि वे मनुष्य की सच्चाई की…
... उन दिनों क्या हुआ करता था जब छापेखाने नहीं थे, पुस्तकें नहीं थी और…
भगवान् के बाहर सब कुछ मिथ्या, भ्रान्ति और दुःखपूर्ण अंधकार है। भगवान् में हैं जीवन,…
भारत का मिशन या जीवन-लक्ष्य है मानवता को मानव-स्वातन्त्र्य, मानव-समानता, मानव-भ्रातृत्व के सच्चे उद्गम की…