और लोग क्या करते हैं उसके बारे में अपने-आपको कष्ट न दो, मैं इस बात को बार-बार नहीं दोहरा सकती।औरों के बारे में निश्चय न करो, दूसरों की निंदा न करो, औरों के साथ तुलना न करो। इसका तुम्हारे साथ कोई वास्ता नहीं।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
हर एक के अपने विचार होते हैं और वह श्रीअरविन्द के लेखों में सें अपने विचारों…
तुम्हारी श्रद्धा, निष्ठा और समर्पण जितने अधिक संपूर्ण होंगे उतना ही अधिक तुम कृपापात्र और…
आन्तरिक एकाग्रता की साधना में निम्नलिखित चीजें सम्मिलित हैं : १. हृदय-केन्द्र में चेतना को…
एक बच्चे की तरह बन जाना और अपने-आपको संपूर्णतः दे देना तब तक असम्भव है…
समता के बिना साधना में दृढ़ आधार नहीं बन सकता। परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी अप्रिय…