श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

विशेष सुरक्षा के अन्दर ही रहो

तुम भली-भांति समझते हो, है न, कि “संरक्षण के अन्दर” होने का क्या मतलब है? “संरक्षण के बाहर चले जाने” का अर्थ भी तुम जानते हो? यदि तुम कोई उलटी चीज करो, उदाहरण के लिए, अगर तुम भगवान् के संरक्षण में हो और एक क्षण के लिए तुम्हारे अन्दर सन्देह या दुर्भावना या विद्रोह का विचार आये तो तुम तुरन्त संरक्षण के बाहर चले जाते हो। संरक्षण तुम्हारे चारों ओर कार्य करता है ताकि विरोधी शक्तियां न आने पायें, कोई दुर्घटना न होने पाये, यानी, अगर तुम चेतना खो भी दो तो संरक्षण के कारण चेतना का अभाव तुरन्त बुरे परिणाम न लायेगा। लेकिन अगर तुम संरक्षण के बाहर चले जाओ और सारे समय जागरूक न रहो तो तुम पर विरोधी शक्तियों का आक्रमण होगा या कोई दुर्घटना हो जायेगी।

 

लेकिन जो सचेतन नहीं हैं?

जो सचेतन नहीं हैं? वहां भी, मैंने बताया है न, कि मैं साधारण लोगों की बात नहीं कर रही थी। मैं साधारण लोगों की बात नहीं कर रही, वे
विशेष संरक्षण में नहीं होते। साधारण लोग साधारण स्थितियों में होते हैं। उन पर नजर रखने वाला विशेष संरक्षण नहीं होता। मैं यह बात उनके
लिए नहीं कह रही। वे जीवन के सभी सामान्य नियमों के अनुसार चलते हैं। तुम ये बातें उन्हें इसी तरह से नहीं समझा सकते…। तुम सब लोगों
की बात सोच रहे थे. कि यह चीज सब लोगों के लिए है? यह बात सिर्फ उनके लिए है जो योग करते हैं, यह सबके लिए नहीं है।

 

संदर्भ : प्रश्न और उत्तर १९५३

 

शेयर कीजिये

नए आलेख

भागवत करुणा और न्याय का कठघरा

भूल या सजा देने का कोई प्रश्न ही नहीं है-अगर लोगों को हम उनकी भूलों…

% दिन पहले

साहस और प्रेम

साहस और प्रेम ही अनिवार्य गुण हैं; और यह सब गुण यदि धुँधले या निस्टेज…

% दिन पहले

आगे बढ़ने का रहस्य

इन छोटी-छोटी बातों से क्यों उत्तेजित हो जाते हो? या उनसे अपने को क्यों विचलित…

% दिन पहले

परात्पर भगवान की ओर

जो श्रद्धा वैश्व भगवान के प्रति जाती है वह लीला की आवश्यकताओं के कारण अपनी…

% दिन पहले

भागवत कार्य में स्थान

भगवान मुझसे क्या चाहते है ? वे चाहते है कि पहले तुम अपने-आपको पा लो,…

% दिन पहले

प्रार्थना

हे समस्त वरदानों के परम वितरक, तुझे, जो इस जीवन को शुद्ध, सुन्दर और शुभ बना…

% दिन पहले