माताजी इस बात का विशेष ध्यान रखती थी कि समाधि की आध्यात्मिक पवित्रता सुरक्षित बनी रहें । वे किसी भी प्रकार के दिखावें या प्रदर्शन के विरुद्ध थी । वे नहीं चाहती थी वहाँ कोई विधि विधान शुरू हो । एक दिन लोगों को फूल उठाते और सजाते देखकर उन्होनें कहा “यह लो एक नया धर्म पैदा हो रहा है ।”
संदर्भ : माताजी की झाकियाँ
भगवान के प्रति पूर्ण आत्म-दान के लिए तीन विशेष विधियाँ : (१) सारे गर्व को…
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…