प्रश्न -कार्य के समय व्यर्थ के विचार घुस आतें है और बाहरी और भीतरी सत्ताओं के संपर्क में बाधा डालते हैं । ऐसा कौन सी विशेष कठिनाई के कारण होता है ?
उत्तर- हर एक जिस कठिनाई का अनुभव करता है उसके अतिरिक्त कोई और विशेष कठिनाई नहीं है । वह है , आन्तरिक एकाग्रता के साथ कार्य का सामंजस्य रखना । यह ऐसी कठिनाई है जिसे जीतना होगा । लेकिन अधिकतर लोगों को इसमें समय लगता है । तुम्हें काम करने के साथ-ही-साथ आन्तरिक सत्ता का मौन भी बनाये रखना चाहिये ।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र एक युवा साधक के नाम
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…