भगवान् पर संपूर्ण भरोसा करने में ही आनंद है।
सन्दर्भ : श्री मातृवाणी (खण्ड-१६)
जब शरीर बढ़ती हुई पूर्णता की ओर सतत प्रगति करने की कला सीख ले तो…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…
हर व्यक्ति अपने स्वभाव के अनुसार कार्य करता है और अगर वह साहस के साथ,…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
मधुर माँ , यहाँ अपने कमरे में बैठ कर ध्यान करने और सबके साथ खेल…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…
भगवान के सिवा कभी किसी दूसरे मनुष्य या दूसरी वस्तु पर, वह चाहे जो हो…
तुम माँ के बच्चे हो और माँ का अपने बच्चों के प्रति प्रेम असीम होता…
यदि अच्छी कामनाएँ हैं तो बुरी कामनाएँ भी आयेंगी। संकल्प और अभीप्सा तो साधना के…