यदि अच्छी कामनाएँ हैं तो बुरी कामनाएँ भी आयेंगी। संकल्प और अभीप्सा तो साधना के अंग हैं, लेकिन कामना के लिए स्थान नहीं है। अगर साधक में कामना है तो उसमें आसक्ति, मांग की भावना, लालसा, समता का अभाव, इच्छित वस्तु न पाने पर शोक तथा दु:ख अवश्य होंगे, और ये सभी चीज़ें अयौगिक है ।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…