शांत रहो और शांति के साथ विश्वासपूर्वक अपना उत्सर्ग कर दो।
जो कुछ होता है वह हमेशा परम प्रभु की इच्छा का प्रभाव होता है ।
मानव कर्म अवसर तो हो सकता है परंतु कारण कभी नहीं ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…