शांत रहो और शांति के साथ विश्वासपूर्वक अपना उत्सर्ग कर दो।
जो कुछ होता है वह हमेशा परम प्रभु की इच्छा का प्रभाव होता है ।
मानव कर्म अवसर तो हो सकता है परंतु कारण कभी नहीं ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
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