बच्चे को कभी डाँटना-फटकारना नहीं चाहिये। माता-पिताओं की बुराई करने के लिए मुझे दोष दिया जाता है ! परन्तु मैंने उन्हें यह करते हुए देखा है, और हाँ, मैं जानती हूँ कि नब्बे प्रतिशत माता-पिता उस बच्चे को डाँटते-फटकारते हैं जो अपने-आप कोई भूल स्वीकार करने के लिए आता है; वे बच्चे की बात धैर्यपूर्वक सुनने के बजाय और उसे यह समझाने के बजाय कि उसका दोष क्या है और उसे कैसे कार्य करना चाहिये, कहते हैं : “तुम बड़े दुष्ट हो, चले जाओ, मुझे अभी फुरसत नहीं।” और बच्चा, जो कि अच्छी भावना के साथ आया था, बिलकुल आहत होकर लौट जाता है और यह भावना लेकर जाता है कि “भला मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया?” तब बच्चा यह देखता है कि मेरे माता-पिता पूर्ण नहीं हैं-और यह बात स्पष्ट ही आज उनके विषय में सही है-वह देखता है कि वे ग़लत हैं और वह अपने-आपसे कहता है : “वे मुझे क्यों डाँटते हैं, वे भी तो मेरे जैसे ही हैं!”
संदर्भ : प्रश्न और उत्तर (१९५०-१९५१)
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…