श्रीअरविंद के वचन

एकाग्रता का मतलब

हमारे योग में एकाग्रता का मतलब है जब चेतना किसी विशेष स्थिति में (जैसे शांति में) या किसी क्रिया में…

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माताजी की उपस्थिति का आच्छादन

माताजी की उपस्थिति हमेशा रहती ही है; पर तुम यदि स्वयं अपने ही ढंग से अपनी निजी भावना, वस्तुओं के…

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आगे बढ़ने का रहस्य

इन छोटी-छोटी बातों से क्यों उत्तेजित हो जाते हो? या उनसे अपने को क्यों विचलित होने देते हो? यदि तुम…

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योग में गंभीरता

योग करने के लिए हमेशा मुंह गंभीर बनाये रखना या चुप रहना आवश्यक नहीं है, पर आवश्यक है कि योग…

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एक महत्वपूर्ण सावधानी

जब कोई प्रगति की जाती है तो वह प्रायः विरोधी शक्तियों को सक्रिय होनेके लिये उकसा देती है, वे शक्तियां…

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हमारी उपस्थिति का अनुभव

माताजी को स्मरण करो और, यद्यपि शरीर से तुम उनसे बहुत दूर हो, उनको अपने साथ अनुभव करने का प्रयास…

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अंतर में माताजी की उपस्थिति

उसे अपने भीतर जाना होगा और अंतर में भगवती माता की और हृदय के पीछे चैत्य पुरुष की उपस्थिति को…

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ईश्वर : श्रीअरविन्द की कविता

  तू जो कि सर्वव्याप्त है समस्त निचले लोकों में , फिर भी है विराजमान बहुत ऊपर , उन सबका…

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कृष्ण

अंततः मुझे मिला इस मधुर और भीषण जगत में आत्मा के जन्म का उद्देश्य, मैंने अनुभव किया पृथ्वी का क्षुधित…

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माताजी की सतत उपस्थिति का तात्पर्य

आपने कहा है, “हमेशा इस प्रकार व्यवहार करो मानों श्रीमां तुम्हारी और ताक रही हों; क्योंकि वह, सचमुच, हमेशा उपस्थित…

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