हर एक को अपनी निश्चिति अपने ही अन्दर खोजनी चाहिये, सब चीजों के बावजूद इसे बनाये, सम्भाले रखना चाहिये और…
स्पष्टतः, अभी यह एक संक्रमण-काल है जो काफ़ी लम्बे समय तक रह सकता है और है भी कष्टदायक। कभी-कभी इस…
“असामञ्जस्य-भरे वातावरण" को पहचानना केवल उसी हद तक उपयोगी हो सकता है जिस हद तक वह हर एक के अन्दर उसे…
... इस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए हमारे अन्दर ऐसी श्रद्धा होनी चाहिये जिसे कोई भी बौद्धिक सन्देह विचलित…
... इन परिवेशों में और इस तरह की बातचीत के दौरान जो चैत्य आत्म-संयम वाञ्छनीय है उसमें दूसरी चीज़ों के…
यह इसलिए है क्योंकि समस्त संसार मिथ्यात्व में पूरी तरह डूबा हुआ है-इसलिए वे सभी कर्म जो ऊपर उभर आते…
"भविष्य के लिए काम करने" का क्या अर्थ है ? आरंभ करने के लिए, पुरानी व्यक्तिगत और राष्ट्रीय आदतों से…
जैसे ही मनुष्य को यह विश्वास हो जाये कि एक जीवन्त और वास्तविक 'सत्य' इस यथार्थ जगत् में व्यक्त होने…
जीव का सबसे अधिक विलक्षण अनुभव यह है कि जब वह दुख-क्लेश के रूप और उससे होने वाली आशंका की…
'परम प्रभु' के लिए पाप का अस्तित्व ही नहीं है - सभी त्रुटियां और दोष सच्ची अभीप्सा और रूपान्तर द्वारा…