श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

खुद की भूल खोजना

“असामञ्जस्य-भरे वातावरण” को पहचानना केवल उसी हद तक उपयोगी हो सकता है जिस हद तक वह हर एक के अन्दर उसे सामञ्जस्य-भरे वातावरण में बदलने की इच्छा जगाये। और यह करने के लिए पहली जरूरी चीज यह है कि हर एक अपने सीमित दृष्टिकोण से बाहर निकले ताकि दूसरों के दृष्टिकोण को समझ सके। हर एक के लिए यह ज्यादा जरूरी है कि औरों की भूल पर आग्रह करने की जगह स्वयं अपने अन्दर भूल को खोजे।

मैंने कहा था कि मैंने जिन लोगों को काम में जिम्मेदारी सौंपी है उन सबसे आशा की जाती है कि वे अपनी जिम्मेदारी के प्रति निष्ठावान् रहेंगे और “आहत होने की भावना” को न घुसने देंगे, और अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए भरसक प्रयास करेंगे।

मेरे आशीर्वाद उन सबके साथ हैं जो सच्चे और सदभावनावाले हैं।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)

शेयर कीजिये

नए आलेख

आंतरिक समझ

​अगर तुम अकेले नहीं हो, बल्कि औरों के साथ रहते हों तो ऐसी आदत डालों…

% दिन पहले

अपने-आपको बुरा-भला कहना

क्या अपने-आपको बुरा-भला कहना प्रगति करने का अच्छा उपाय है ?   अपने-आपको बुरा भला-भला…

% दिन पहले

अच्छे और बुरे स्वप्न

मधुर माँ, हम स्वप्न में अच्छे और बुरे में कैसे फ़र्क़ कर सकते हैं। सिद्धांत…

% दिन पहले

यौगिक कर्म

योग के दृष्टिकोण से, तुम जो करते हो वह नहीं बल्कि तुम कैसे करते हो…

% दिन पहले

सावधानी

अगर तुम जीवन में एक भूल करो तो हो सकता है कि तुम्हें सारे जीवन…

% दिन पहले

समुचित मार्ग

(अधिकतर साधक) अहंकारी होते हैं और वे अपने अहंभाव को अनुभव या स्वीकार नहीं करते।…

% दिन पहले