श्रीअरविंद ने , सामूहिक सिद्धि के मुहूर्त को शीघ्र लाने के लिए, अपनी देह की सिद्धि का परित्याग कर, परम…
किसी भी वस्तु को, कहीं भी, अपने सत्ता के सत्य को अस्वीकार न करने दो : यही निष्कपटता है ।…
मैं भौतिक जगत् में, धरती पर क्या लाना चाहती हूं : १. पूर्ण 'चेतना'। २. पूर्ण 'ज्ञान', सर्वज्ञता। ३. अजेय…
हे प्रभो, मैं तेरे आगे सदा एक कोरे पृष्ठ की तरह रहना चाहूंगी ताकि मेरे अन्दर तेरी इच्छा किसी कठिनाई…
रात को जागते रहने की कोशिश करना ठीक मार्ग नहीं है; आवश्यक निद्रा का निग्रह करने से शरीर तामसिक हो…
क्या चेतना के सुधार से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति सुस्थिर हो जाती है? यदि "चेतना के सुधार" का मतलब है…
अवसाद हमेशा तीव्र अहंकार का द्योतक होता है। जब तुम उसे अपने समीप आते हुए अनुभव करो तो अपने -…
मधुर माँ, ज्ञान और बुद्धि क्या हैं ? क्या हमारे जीवन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है ? ज्ञान और बुद्धि…
श्रीक़ृष्ण ने मुझे वेदों का वास्तविक अर्थ बतलाया है, इतना ही नहीं, बल्कि उन्होने मुझे भाषा-शास्त्र का एक नया विज्ञान…
. . . (हे प्रभो!) तू यह निश्चय कब करेगा कि इस सारे प्रतिरोध के ग़ायब होने का समय आ…