श्रीकृष्ण और वेद

श्रीक़ृष्ण ने मुझे वेदों का वास्तविक अर्थ बतलाया है, इतना ही नहीं, बल्कि उन्होने मुझे भाषा-शास्त्र का एक नया विज्ञान भी दर्शाया है जिसमें मानव वाणी की प्रक्रिया तथा मूल दिग्दर्शित है और जिसमें एक नया ‘निरुक्त’ बनाया जा सकता है और इस पर आधारित वेद का नया अर्थ पाया जा सकता है । उन्होनें मुझे उपनिषदों में निहित सब कुछ का अर्थ दिखलाया है जिन्हें न भारतीय समझ पाये न यूरोपवासी । इसलिये मुझे सम्पूर्ण वेदान्त और वेदों की पुनर्व्यख्या इस प्रकार करनी है कि जिससे यह पता चले कि कैसे सभी धर्म इसी से उत्पन्न हुए हैं और सब जगह वे एक ही हैं। इस प्रकार यह प्रमाणित हो जाएगा कि भारत विश्व-भर के धार्मिक जीवन का केंद्र है और यह कि सनातन धर्म के माध्यम से ही वह सबका मुक्तिदाता और भाग्य-विधाता बनेगा ।

संदर्भ : सी॰डबल्यू॰एस॰ए ३२

चित्र : ऋतम उपाध्याय 

 

 

शेयर कीजिये

नए आलेख

उपस्थिति का अनुभव

हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…

% दिन पहले

ध्यान कहाँ?

मधुर माँ , यहाँ  अपने कमरे में बैठ कर ध्यान करने और सबके साथ खेल…

% दिन पहले

प्रगतिशील बनों

कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…

% दिन पहले

केवल एक सहारा

भगवान के सिवा कभी किसी दूसरे मनुष्य या दूसरी वस्तु पर, वह चाहे जो हो…

% दिन पहले

श्रीमाँ के बालक

तुम माँ के बच्चे हो और माँ का अपने बच्चों के प्रति प्रेम असीम होता…

% दिन पहले

कामनाएँ

यदि अच्छी कामनाएँ हैं तो बुरी कामनाएँ भी आयेंगी। संकल्प और अभीप्सा तो साधना के…

% दिन पहले