श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

श्रीमां की प्रार्थना

हे प्रभो, मैं तेरे आगे सदा एक कोरे पृष्ठ की तरह रहना चाहूंगी ताकि मेरे अन्दर तेरी इच्छा किसी कठिनाई या किसी भी मिश्रण के बिना लिखी जा सके।

कभी-कभी विचार से पिछली अनुभूतियों की स्मृति तक बुहार फेंकनी जरूरी होती है ताकि वे सतत नव निर्माण के कार्य में बाधक न हों। केवल यही एक चीज है जो सापेक्षताओं के जगत् में तेरी पूर्ण अभिव्यक्ति को आने की अनुमति देती है।

बहुधा आदमी उस चीज से चिपटा रहता है जो थी, उसे बहुमूल्य अनुभूति के परिणाम को खो देने का, एक विस्तृत और उच्च चेतना के छूट जाने का, निचली अवस्था में जा गिरने का भय रहता है। लेकिन उसे किस बात का खटका जो तेरा है, क्या वह तेरे अंकित किये हुए पथ पर, वह चाहे कोई भी पथ क्यों न हो, चाहे उसकी सीमित समझ के लिए एकदम अबोधगम्य क्यों न हो, क्या वह उस पर आनन्दमयी
आत्मा और प्रबुद्ध भ्रू के साथ नहीं चल सकता?

हे प्रभो, विचार के पुराने ढांचों को तोड़ दे, प्राचीन अनुभूतियों को लुप्त कर दे और अगर तू जरूरी समझे तो सचेतन समन्वय को भी विघटित कर दे ताकि तेरा कार्य अधिकाधिक अच्छी तरह पूरा हो, धरती पर तेरी सेवा पूर्ण हो सके।

संदर्भ : प्रार्थना और ध्यान 

शेयर कीजिये

नए आलेख

श्रीमाँ को स्वप्न में देखना

मधुर माँ, क्या नींद में अपने ऊपर पूरी तरह नियंत्रण पाना संभव है ? उदाहरण…

% दिन पहले

सर्वोत्तम उदाहरण

व्यापक दृष्टि से विचार करने पर मुझे ऐसा लगता है कि प्रचार करने योग्य सबसे…

% दिन पहले

सच्ची वीरता

तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…

% दिन पहले

अच्छी नींद के लिए

अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…

% दिन पहले

भय और बीमारी

तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…

% दिन पहले

सच्ची करुणा

साधक को क्या होना चाहिये इसके बारे में मैं तुम्हारे भावों की कदर करती हूँ…

% दिन पहले