. . . (हे प्रभो!) तू यह निश्चय कब करेगा कि इस सारे प्रतिरोध के ग़ायब होने का समय आ गया है!
धरती पर तूफ़ान की तरह विकराल शक्तियाँ झपट पड़ी हैं, ऐसी शक्तियाँ जो अंधेरी हिंसात्मक, शक्तिशाली और अंधी हैं। हे प्रभो, हमें शक्ति दे कि हम उन्हें प्रदीप्त कर सकें । तेरी भव्यता को उनके अंदर हर जगह फूट पड़ना और उनकी क्रियाओं को रूपांतरित करना चाहिये : उनकी विनाशकारी यात्रा अपने पीछे दिव्य बुआई छोड़ जाये। . . .
ओ मेरे दिव्य स्वामी, मेरी भेंट को अस्वीकार न कर। मुझे इस योग्य बना कि मैं दान की बहुलता और अभिव्यक्ति की परिपूर्णता में पूरी तरह तेरी हो जाऊँ।
संदर्भ : प्रार्थना और ध्यान
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…