अभ्यास

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ज़रा-सा सच्चा निष्कपट और नियमित अभ्यास, बहुत से अल्पजीवी प्रणों से कहीं अधिक मूल्यवान है। संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड -१६)

बच्चो की शरारत

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बच्चों को यह समझ कर शरारत छोडनी चाहिये कि शरारती होना शर्म की बात है, न कि सजा के डर…

विद्यार्थियों की प्रार्थना

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हमें वह वीर योद्धा बना जो बनने के लिए हम अभिप्सा करते हैं। वर दे कि हम डटे रहने का…

श्रीमाँ की शक्ति

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प्रायः ही श्रीअरविंद कहते हैं कि व्यक्ति को श्रीमाँ की शक्ति को शासन करने देना चाहिये । क्या इसका यह…

आध्यात्मिक सहायता

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मेरे प्यारे बालक, जब कभी तुम्हें आध्यात्मिक सहायता की ज़रूरत हो मैं हमेशा तुम्हें सहायता देने को तैयार रहती हूँ…