ज़रा-सा सच्चा निष्कपट और नियमित अभ्यास, बहुत से अल्पजीवी प्रणों से कहीं अधिक मूल्यवान है।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड -१६)
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…