मेरे प्यारे बालक,
जब कभी तुम्हें आध्यात्मिक सहायता की ज़रूरत हो मैं हमेशा तुम्हें सहायता देने को तैयार रहती हूँ चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो।
मेरे प्रेम और आशीर्वाद के साथ ।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड – १६)
जीवनयात्रा में समस्त भय, संकट और विपदा का सामना करने के लिए कवच के रूप…
अपने तुच्छ, स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व से बाहर निकलो ओर अपनी भारतमाता के योग्य शिशु बनो ।…
सारी समस्या का निचोड़ यह है : बुद्धि के मानसिक प्रशासन की जगह आध्यात्मिक चेतना…