अनुभूति और तार्किक मन

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अनुभूति तार्किक मन से बहुत आगे तक जाती है । स्पष्ट है कि तार्किक मन को भगवान् तक पहुंचाना बहुत…

भौतिक चीजों का खयाल

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   माताजी, मैं अपनी चीजें बार-बार क्यों खोता रहता हूं ?   क्योंकि तुम चीजों को काफी हद तक अपनी…

थकान का कारण

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तुम जो करते हो उसे बिना रुचि के करने से थकान आती है । तुम जो कुछ करो उसमें रुचि…

समय की परवाह नहीं

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तुम्हें जो चीज जाननी चाहिए वह है, ठीक तरह से यह जानना कि तुम जीवन में क्या करना चाहते हो|…

श्रीअरविंद की उपस्थिति

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श्रीअरविन्द निरन्तर हमारे साथ हैं और जो लोग उन्हें देखने और सुनने के लिए तैयार हैं उनके आगे अपने- आपको…

कौन योग्य और कौन अयोग्य ?

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​'भागवत कृपा' के सामने कौन योग्य है और कौन अयोग्य ?   सभी तो उसी एक दिव्य 'मां' के बालक…

श्रीमाँ और श्रीअरविंद की पुस्तकें पढ़ने का सही तरीका

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मधुर मां, हमें आपकी और श्रीअरविन्द की पुस्तकें कैसे पढ़नी चाहिये ताकि वे मन द्वारा समझे जाने की जगह हमारी चेतना…

भारत का मिशन

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मैं अधिक-से-अधिक स्पष्ट रूप से यह देख रहा हूँ कि मनुष्य उस निरर्थक घेरे से तब तक बाहर कभी नहीं…

भारत का मानचित्र

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("माताजी के भारत के मानचित्र" के बारे में जो आश्रम के क्रीड़ांगड़) यह सब तरह के अस्थायी रूपों के बावजूद…