(“माताजी के भारत के मानचित्र” के बारे में जो आश्रम के क्रीड़ांगड़)
यह सब तरह के अस्थायी रूपों के बावजूद सच्चे भारत का मानचित्र हैं, और यही हमेशा सच्चे भारत का मानचित्र रहेगा, लोग इसके बारे में कुछ भी क्यों न सोचें ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…