व्यक्ति को हमेशा हँसना चाहिये, हमेशा। ‘प्रभु’ हँसते है और हँसते रहते हैं। ‘उनका’ हास्य इतना अच्छा है, इतना अच्छा है, प्रेम से इतना परिपूर्ण है। यह ऐसा हास्य है जो तुम्हें असाधारण मधुरता के साथ अपनी भुजाओं में भर लेता है !
मनुष्यों ने उसे भी विकृत कर दिया है – उन्होने हर चीज़ विकृत कर दी है। (माताजी हँसती है )
संदर्भ : पथ पर
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…
कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…