जो कुछ ग्रहणशील नहीं है वह सब कुचले जाने का अनुभव करता है, लेकिन जो ग्रहणशील है वह इसके विपरीत एक… एक प्रबल विस्तार का अनुभव करता है।
एक ही समय में दोनों।…
हां, जो चीज कुचली जाती है वह, वह चीज है जो प्रतिरोध करती है, जो ग्रहणशील नहीं है। उसे केवल अपने-आपको खोल देना है। तब वह चीज मानों… दुर्जेय वस्तु बन जाती है…। यह असाधारण है। यह हमारी शताब्दियों की आदत है, है न, जो प्रतिरोध करती है और ऐसा संस्कार देती
है। लेकिन जो कुछ भी खुल जाता है… व्यक्ति को ऐसा लगता है मानों वह बड़ा, बड़ा, बड़ा होता जा रहा है…। यह बहुत भव्य है। ओह ! यह…
सन्दर्भ : पथ पर
अप्रिय विचार अप्रिय भावनाएं लाते हैं--अप्रिय भावनाएं तुम्हें भगवान् से दूर ले जाती हैं और…
भूल या सजा देने का कोई प्रश्न ही नहीं है-अगर लोगों को हम उनकी भूलों…
इन छोटी-छोटी बातों से क्यों उत्तेजित हो जाते हो? या उनसे अपने को क्यों विचलित…
जो श्रद्धा वैश्व भगवान के प्रति जाती है वह लीला की आवश्यकताओं के कारण अपनी…
भगवान मुझसे क्या चाहते है ? वे चाहते है कि पहले तुम अपने-आपको पा लो,…