जब तक कि मनुष्य अपने अन्दर गहराई में नहीं जीता और बाहरी क्रिया-कलापों को बस सत्ता की सतह के रूप में नहीं देखता, तब तक सांसारिक जीवन में शांति प्राप्त करना और उसे स्थायी बनाये रखना कभी आसान नहीं होता ।

संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र (भाग -३)

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