सांसारिक जीवन संघर्ष का जीवन है – इस पर उचित तरीके से चलने के लिए तुम्हें अपना जीवन तथा अपनी क्रियाएँ भगवान को समर्पित करनी चाहियें और अपने अंदर भगवान की शांति के लिए प्रार्थना करनी चाहिये। मन जब अचंचल हो जाता है, तब तुम यह अनुभव कर सकते हो कि दिव्य माँ तुम्हारें जीवन को सहारा दिये हुए हैं, और तब तुम सब कुछ उनके हाथों में सौंप दो।

संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र

शेयर कीजिये

नए आलेख

शिकायतों का महत्त्व

'ख' ने मुझसे कहा है कि आपके पास मेरे विरुद्ध यह शिकायत आयी है कि…

% दिन पहले

उचित वृत्ति

कुछ ऐसे अति-धर्मशील लोग होते है जो अपने सामने समस्याएँ  तो खड़ी कर लेते हैं,…

% दिन पहले

श्रीअरविंद से मिलना

श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…

% दिन पहले

उपस्थिति का अनुभव

हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…

% दिन पहले

ध्यान कहाँ?

मधुर माँ , यहाँ  अपने कमरे में बैठ कर ध्यान करने और सबके साथ खेल…

% दिन पहले

प्रगतिशील बनों

कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…

% दिन पहले