कब तक तुम इस मन के गोलाकार पथों पर चक्कर खाते रहोगे ?
अपनी क्षुद्र अहम सत्ता और नगण्य वस्तुओं से घिरे रहोगे ?
संदर्भ : सावित्री
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कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…