केवल थे सुरक्षित जिन्होने सँजोये रखा भगवान को अपने हृदय में अपने:
साहस की ढाल और श्रद्धा का लेकर कृपाण, उन्हें चलना होगा ,
भुजाएँ प्रहार के लिए तत्पर, आँखें करें शत्रु की टोह,
करते हुये निक्षेपित बरछा सामने ध्यान से ,
प्रकाश की सेना के नायक और सैनिक।
संदर्भ : ‘सावित्री’
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…