मैं सदा अधिक सावधान रहने की कोशिश करता हूँ, लेकिन मेरे हाथ से चीज़ें ख़राब हो जाती हैं ।
हाँ, यह प्रायः होता है; लेकिन तुम्हें शांति को आधिकाधिक अंदर बुलाना चाहिये और अपने शरीर के कोषाणुओं में प्रवेश करने देना चाहिये; तब फूहड़पन के सुझावों का कोई असर न रहेगा।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…