माँ, मुझे लगता है कि मैं बहुत ही छिछोरा व्यक्ति हूँ। क्या आप मुझे बदलोगी नहीं ?
मैं तुम्हें बदल कर बहुत खुश होउंगी, लेकिन क्या तुम्हें पूरा विश्वास है कि तुम्हारे अन्दर जो चीज़ छिछोरी है वह बदलना चाहती भी है ?
तुम मुझसे सहायता की आशा कैसे करते हो जब तुम्हें मेरे ऊपर भरोसा ही नहीं है !
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…
कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…