सच्चा आराम आन्तरिक जीवन में होता है, जिसके आधार में होती है शांति, नीरवता तथा कामना की अनुपस्थिति। इसके सिवाय सचमुच और कोई आराम नहीं है – क्योंकि इसके बिना शरीर की मशीन -चाहे तुम चाहो या न चाहो – चलती ही रहती है। आन्तरिक मुक्ति ही सच्चा उपचार है ।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र (भाग-४)
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…