यदि तुम्हारें ह्रदय और तुम्हारी आत्मा में आध्यात्मिक परिवर्तन के लिए सच्ची अभीप्सा jहै, तब तुम्हें पथ और ‘पथ-प्रदर्शक’ दोनों मिल जायेंगे। मात्र मानसिक खोज तथा जिज्ञासा आत्मा के प्रवेश-द्वार को खोलने के लिए काफ़ी नहीं हैं।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र (भाग-२)
जीवनयात्रा में समस्त भय, संकट और विपदा का सामना करने के लिए कवच के रूप…
अपने तुच्छ, स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व से बाहर निकलो ओर अपनी भारतमाता के योग्य शिशु बनो ।…
सारी समस्या का निचोड़ यह है : बुद्धि के मानसिक प्रशासन की जगह आध्यात्मिक चेतना…