अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है। अच्छी नींद के लिए मन, प्राण और शरीर को भी अपने को शिथिल छोड़ना और निश्चल बनाना सीखना होगा।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र
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