श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

शिष्य की प्रार्थना

मेरी प्यारी माँ,

मेरा हृदय तुम्हारे चरणों की ओर दौड़ना चाहता है और अपने-आपको तुम्हारे अंदर खो देना चाहता है । मैं यही चाहता हूँ, लेकिन क्या मैंने यह कर लिया है ? मैं तुम्हारे हृदय के निकट होना चाहता हूँ, मैं चाहता हूँ … पर क्या यह संभव है ? मुझे पता नहीं ।

मुझे शांत करो, मुझे अपनी दिव्य उपस्थिती का रस प्रदान करो ।

 

हाँ, मेरे प्यारे बच्चे, यह पूरी तरह संभव है और चूंकि तुम सच्चाई के साथ यह चाहते हो इसलिए ऐसा हो जायेगा। तुम अपने-आपको हमेशा मेरे हृदय के निकट, मेरी भुजाओं में झूलते हुए अनुभव करोगे। और शांति तुम्हारी सत्ता को भर देगी और तुम्हें मजबूत और आनंदपूर्ण बनायेगी।

तुम्हारी माँ की ओर से प्यार ।

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)

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