मेरा वर्तमान जीवन अनुशासनरहित है, हालांकि मैं सोचता हूँ कि वह अचंचल है । क्या आप चाहेंगी कि यह कुछ अधिक नियमित हो ?
तुम्हें अपनी भौतिक चेतना को अंदर से अनुशासित करना चाहिये और अंदर से ही तुम्हारे भौतिक जीवन के लिए व्यवस्था भी आयेगी।
संदर्भ : शांति दोशी के साथ
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…