शांत रहो और देखो। परिणाम निश्चित है – उपाय और समय निश्चित नहीं है ।
आशीर्वाद |
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड -१६)
जीवनयात्रा में समस्त भय, संकट और विपदा का सामना करने के लिए कवच के रूप…
अपने तुच्छ, स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व से बाहर निकलो ओर अपनी भारतमाता के योग्य शिशु बनो ।…