हमारी भूल यह हुई है और बराबर ही रही है कि हम अज्ञानी जीवन की बुराइयों से बचने के लिये एक उपाय के रूप में सन्यास को ग्रहण करते हैं तथा सन्यास की बुराइयों से बचने के लिये फिर अज्ञान के जीवन की ओर लौट आते हैं । हम निरन्तर इन दो मिथ्या विरोधियों के बीच झूला करते है ।
संदर्भ : विचारमाला और सूत्रावली
जीवनयात्रा में समस्त भय, संकट और विपदा का सामना करने के लिए कवच के रूप…
अपने तुच्छ, स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व से बाहर निकलो ओर अपनी भारतमाता के योग्य शिशु बनो ।…