विश्व की अंतिम सीमा तक … बल्कि उसके भी परे तक अपना विस्तार करो।
प्रगति की समस्त आवश्यकताओं को हमेशा अपने ऊपर ले लो और उनका समाधान ऐक्य के आनन्द में करो । तब तुम भागवत हो जाओगे।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
हमेशा ऐसे जियो मानों तुम 'परम प्रभु' तथा 'भगवती माँ' की दृष्टि के सामने हो।…
समाजवादी चाहते हैं पूंजीवाद को खत्म करना, किन्तु ऐसा न करना बेहतर होगा। वे राष्ट्रीय…
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…