केवल वही वर्ष जो व्यर्थ में बिताये जाते हैं तुम्हें बूढ़ा बनाते हैं ।
जिस वर्ष में कोई प्रगति नहीं की गयी, चेतना में कोई वृद्धि नहीं हुई, पूर्णता की ओर कोई अगला क़दम नहीं उठाया गया वह वर्ष व्यर्थ में बिताया गया।
अपने जीवन को अपने-आपसे कुछ उच्च्तर और विशालतर वस्तु को चरितार्थ करने पर एकाग्र करो तो तुम्हें बीतते हुए वर्षों का भार कभी न लगेगा ।
संदर्भ : ‘शिक्षा’ के विषय में
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