श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

सत्य की शक्ति

सत्य ‘शक्ति’ हमेशा अचंचल होती है । दुर्बलता और अपूर्णता के निश्चित लक्षण हैं – बेचैनी, उत्तेजना तथा अधीरता।

तुम्हें बाहरी परिस्थितियों में अचंचलता की खोज न करनी चाहिये, वह तुम्हारें अपने अन्दर है । सत्ता की गहराइयों के अन्दर एक ऐसी शांति है जो समस्त सत्ता में , शरीर तक में अचंचलता लाती है – अगर तुम उसे लाने दो ।

तुम्हें उस शांति की खोज करनी चाहिये और तब तुम्हें वह अचंचलता मिल जायेगी जिसकी तुम्हें चाह है ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग -२)

शेयर कीजिये

नए आलेख

सावधानी

अगर तुम जीवन में एक भूल करो तो हो सकता है कि तुम्हें सारे जीवन…

% दिन पहले

समुचित मार्ग

(अधिकतर साधक) अहंकारी होते हैं और वे अपने अहंभाव को अनुभव या स्वीकार नहीं करते।…

% दिन पहले

अवतार की सम्भावना

अवतार की सम्भावना पर विश्वास करने या न करने से प्रकट तथ्य पर कोई फ़र्क़…

% दिन पहले

ध्यान कहाँ ?

मधुर माँ,  यहाँ अपने कमरे में बैठ कर ध्यान करने और सबके साथ खेल के…

% दिन पहले

कुछ भी असंभव नहीं

यदि चैत्य पुरुष की प्रकृति जाग्रत हो जाए, अपने पीछे विद्यमान माताजी की चेतना और…

% दिन पहले

रूपान्तर की अवस्थाएँ

भागवत चेतना की विभिन्न अवस्थाएँ होती हैं। रूपांतर की भी विभिन्न अवस्थाएँ होती है। पहली…

% दिन पहले