सृष्टि का स्वामी हमारे अन्तर में छिपा बसता है
और अपनी आत्म चित्शक्ति के साथ लुका-छिपी खेलता है;
रहस्यमय परमेश्वर विश्व-प्रकृति में उसका साधन बन रमता है।
संदर्भ : “सावित्री”
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…