सृष्टि का स्वामी हमारे अन्तर में छिपा बसता है
और अपनी आत्म चित्शक्ति के साथ लुका-छिपी खेलता है;
रहस्यमय परमेश्वर विश्व-प्रकृति में उसका साधन बन रमता है।
संदर्भ : “सावित्री”
यह रहा एक उपाय उन लोगों के लिए जो मिथ्यात्व से पिंड छुड़ाने के लिए…
तुम्हें जो चीज़ जाननी चाहिये वह है, ठीक तरह से यह जानना कि तुम जीवन…
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…