सृष्टि का स्वामी हमारे अन्तर में छिपा बसता है
और अपनी आत्म चित्शक्ति के साथ लुका-छिपी खेलता है;
रहस्यमय परमेश्वर विश्व-प्रकृति में उसका साधन बन रमता है।
संदर्भ : “सावित्री”
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…
कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…