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भय को उठा फेंको

प्यारी माताजी,

मुझे सर्दी हो गयी है, क्या मैं रोज़ की तरह स्नान करूँ ?

जो तुम्हें पसंद हो करो, इसका बहुत महत्व नहीं है; लेकिन जो चीज़ महत्वपूर्ण है वह है भय को उठा फेंकना । भय ही तुम्हें बीमार करता है और भय के कारण ही रोगमुक्त होना इतना कठिन होता है । समस्त भय को जीतना चाहिये और उसके स्थान पर भागवत कृपा पर पूर्ण विश्वास को लाना चाहिये।

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)

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