श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

क्या तुम सुरक्षित हो ?

कोई आसक्ति न हो, कोई कामना न हो, कोई आवेग न हो, कोई पसंद न हो; पूर्ण समता हो, अचल शांति हो और भागवत सरंक्षण में अटल श्रद्धा हो ; ये सब हों तो तुम सुरक्षित हो और न हों तो तुम जोखिम में हो। और जब तक तुम सुरक्षित नहीं हो तब तक मुर्गी के उन छोटे बच्चों की तरह रहना ही ठीक है जो अपनी माँ के डेनों के नीचे आश्रय लेते हैं।

संदर्भ : प्रश्न और उत्तर १९२९-१९३१

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