भगवान की इच्छा है कि हम हमेशा ऐसी नहरें हों जो हमेशा खुली रहती हैं, हमेशा बहुत चौड़ी हों, ताकि भगवान की शक्तियाँ साँचे में प्रचुर मात्र में ढल सकें।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…