बच्चों को यह समझ कर शरारत छोडनी चाहिये कि शरारती होना शर्म की बात है, न कि सजा के डर से।
पहली अवस्था में, वह सचमुच उन्नति करता है ।
दूसरी में, वह मानव चेतना में एक पग और नीचे उतार जाता है, क्योंकि भय चेतना का अध: पतन है ।
संदर्भ : शिक्षा के ऊपर
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