हे प्रभों, तू मेरा आश्रय और मेरा वरदान है, मेरा बल, मेरा स्वस्थ्य, मेरी आशा और मेरा साहस है । तू ही परम शांति, अमिश्रित आनंद, पूर्ण स्वच्छता है । मेरी पूरी सत्ता असीम कृतज्ञता और अनन्त पुजा में तेरे आगे साष्टांग दंडवत है और वह पूजा मेरे हृदय और मेरे मन से तेरी ओर उसी तरह उठती है जैसे भारत की सुगंधित धूप का शुद्ध धुआं … ।

संदर्भ : प्रार्थना और ध्यान 

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