जब तुम अपने-आपको किसी नि:स्वार्थ कार्य की परिपूर्णता के लिये सौंप देते हो तो कभी सामान्य लोगों से प्रशंसा या सहायता की आशा न करो। इसके विपरीत, वे हमेशा तुम्हारे विरुद्ध लड़ेंगे , तुमसे घृणा करेंगे और तुम्हें बुरा भला कहेंगे ।
परंतु भगवान हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगे।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…