केवल उस समय जब मनुष्यों के विकास के लिए यह आवश्यक नहीं रह जाएगा कि मेरा शरीर उनके समान रहे, तब यह स्वयं को अतिमानस से संयुक्त करने के लिए स्वतंत्र हो जाएगा ।
संदर्भ : माताजी का अजेंडा (भाग-१)
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…