नियंत्रण के बिना कोई समुचित काम संभव नहीं है ।
नियंत्रण के बिना समुचित जीवन संभव नहीं है ।
और सबसे बढ़कर, नियंत्रण के बिना कोई साधना नहीं है ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)
पूर्णयोग के साधक को यह अवश्य स्मरण रखना चाहिये कि कोई भी लिखित शास्त्र नित्य…
हर एक के अपने विचार होते हैं और वह श्रीअरविन्द के लेखों में सें अपने विचारों…
तुम्हारी श्रद्धा, निष्ठा और समर्पण जितने अधिक संपूर्ण होंगे उतना ही अधिक तुम कृपापात्र और…
आन्तरिक एकाग्रता की साधना में निम्नलिखित चीजें सम्मिलित हैं : १. हृदय-केन्द्र में चेतना को…
एक बच्चे की तरह बन जाना और अपने-आपको संपूर्णतः दे देना तब तक असम्भव है…